रेवांचल टाइम्स - शासन द्वारा विभिन्न शासकीय योजनाओं शैक्षणिक कार्यों के अलावा अन्य विभागीय कार्यों में भारतीय पोस्टल आर्डर लगाया जाना अनिवार्य है। जिसके तहत संबंधित लोगों द्वारा पोस्टल आर्डर कर दे जाते हैं लेकिन लांजी ब्लॉक मुख्यालय पर संचालित पोस्ट ऑफिस में करीब 4 माह से 10, 20 एवं 50 रू. के अलावा अन्य छोटे पोस्टल आर्डर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जिसके चलते क्षेत्र के लोग परेशान हो रहे हैं और बार-बार पोस्ट ऑफिस के चक्कर लगाने को मजबूर रहते हैं जानकारी अनुसार स्थानीय पोस्ट ऑफिस में 1 व 2 से लेकर 10, 20 एवं 50 रू. तक के पोस्टल आर्डर में नहीं मंगाए जा रहे हैं जिस कारण लोगों को जिला मुख्यालय से पोस्टल आर्डर मंगाना पड़ता है । स्थानीय लोगों ने जानकारी से अवगत कराते हुए बताया कि पोस्टल आर्डर लेने के लिए जिला मुख्यालय के पोस्ट ऑफिस जाते हैं तो वहां भी उपरोक्त पोस्टल आर्डर समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते और वहां सीमित समय के लिए काउंटर खुलता है जिस कारण लोगों को कि हाथ में आना-जाना ही शेष रह जाता है। संबंधित विभाग द्वारा इसकी उपलब्धता कराएं जाने में आनाकानी की जा रही है। जिससे क्षेत्र के लोगों को ज्यादा दिक्कतें आ रही है। क्षेत्रवासियों ने ही शीघ्र ही केंद्र शासन से जारी सभी पोस्टल आर्डर स्थानीय पोस्ट ऑफिस में उपलब्ध कराए जाने की मांग प्रशासन से की है।
कर्मियों की कमी से जूझ रहे छोटे डाकघर
डाकघरों में कम हो रहे कर्मचारी अब इनके अस्तित्व की समस्या बन गए हैं। बढ़ रहे काम के कारण एक-एक कर्मचारी को पांच-पाच कर्मचारियों का काम देखना पड़ रहा है। इसके चलते विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं काम की गुणवता में भी गिरावट आ गई है। उधर पांच.पांच कर्मचारियों का काम संभालने वाले एक एक कर्मचारी काम के बोझ के तले दब कर सिर्फ टाइमपास की नीतियों पर चल रहा है। इस मामले को लेकर अधिकारियों के समक्ष विभाग के कर्मचारी संगठनों की भी नहीं चल रही है। अधिकारी यह कह कर पल्लू झाड़ लेते है कि सरकार नई भर्ती ही नहीं कर रही है।
कोरियर सर्विस ने घटाई डाकघरों की उपयोगिता
भारतीय डाक विभाग से सामान भेजना प्राइवेट कोरियर से कहीं ज्यादा सस्ता है, बावजूद बड़ी संख्या में लोग आज भी सरकारी डाकघर के बजाय कोरियर से सामान भेजना पसंद करते हैं। जानकारों की माने तो इसकी वजह 'टाइम है। उपभोक्ताओं को लगता है कि प्राइवेट कोरियर कंपनी का पार्सल तय समय पर पहुंचता है जबकि डाक विभाग कुछ अधिक घंटे ले लेता है। जिस कारण अब लोगों द्वारा डाक सेवा को दरकिनार कर प्राइवेट कोरियर सर्विस को ज्यादा तवज्जो देते हैं। जिसका खामियाजा डाक विभाग को भुगतना पड़ रहा है। वही यहां उपडाकघर में पदस्थ कर्मियों का आम लोगों के साथ व्यवहार भी डाकघर से लोगों को मुंह मोडऩे के लिए मजबूर कर देता है।
जिम्मेदार ही झाड़ लेते हैं अपनी जिम्मेदारी से पल्ला
लांजी उपडाकघर में जब भी कभी कोई व्यक्ति अपने कार्यों को कराने के लिये पहुंचता है तो उन्हें काम के निपटारे की बजाय परेशानी ही प्राप्त होती है। क्योंकि यहां पर पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा हमेशा ही अपने कार्यों को समय पर संपादित न करते हुए अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए आसानी से देखा जा सकता है। वहीं इनसे प्रश्र किये जाने पर इनके द्वारा गोल मटोल जवाब देकर कार्यों में खानापूर्ति ही की जाती है।
रेवांचल टाइम्स लांजी, बालाघाट से खेमराज सिंह बनाफरे
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